नक्षत्र 6 / 27

आर्द्रा नक्षत्र

Ardra · स्वामी राहु · 6°40′ मिथुन – 19°60′ मिथुन

संक्षिप्त उत्तर

आर्द्रा, 'नम' (बीटलजूज़), के देवता रुद्र हैं — वह तूफ़ान जो वातावरण साफ़ करता है। प्रतीक आँसू है: यह नक्षत्र तीव्र भावना, टूटन और नवीनीकरण से जुड़ा है। आर्द्रा जातक प्रायः प्रखर, प्रश्न करने वाले और कठिन विषयों से न डरने वाले होते हैं।

स्वामीराहु
गणमनुष्य
योनिश्वान (स्त्री)
नाड़ीआदि
दशाराहु · 18 वर्ष

चार पद और नामाक्षर क्या हैं?

पदआरंभनवांश राशिनामाक्षर
16°40′ मिथुनधनुKu (कू)
210°00′ मिथुनमकरGha (घ)
313°20′ मिथुनकुंभNa (ङ)
416°40′ मिथुनमीनChha (छ)

आर्द्रा दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?

चंद्रमा आर्द्रा में हो तो जीवन राहु महादशा (18 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद गुरु दशा आती है।

गुण मिलान में आर्द्रा की क्या भूमिका है?

समान नाड़ी (आदि) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: अश्विनी, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।

समान गण (मनुष्य) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: भरणी, रोहिणी, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद.

समान योनि (श्वान) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: मूल.

आर्द्रा के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?

आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

आर्द्रा का स्वामी राहु है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा राहु की होती है।

आर्द्रा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: कू, घ, ङ, छ।

आर्द्रा का गण और नाड़ी क्या है?

गण: मनुष्य, नाड़ी: आदि, योनि: श्वान।

शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम

पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।

शिशु नाम रिपोर्ट

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