नक्षत्र 17 / 27

अनुराधा नक्षत्र

Anuradha · स्वामी शनि · 3°20′ वृश्चिक – 16°40′ वृश्चिक

संक्षिप्त उत्तर

अनुराधा के देवता मित्रता और सहयोग के देव मित्र हैं और प्रतीक कीचड़ से खिलता कमल है। यह भक्ति और गठबंधन का नक्षत्र है: संबंधों, निष्ठा और अनुशासन से सफलता। शनि धैर्य देता है — कठिन परिस्थितियों में भी जातक खिल उठते हैं।

स्वामीशनि
गणदेव
योनिमृग (स्त्री)
नाड़ीमध्य
दशाशनि · 19 वर्ष

चार पद और नामाक्षर क्या हैं?

पदआरंभनवांश राशिनामाक्षर
13°20′ वृश्चिकसिंहNa (ना)
26°40′ वृश्चिककन्याNi (नी)
39°60′ वृश्चिकतुलाNu (नू)
413°20′ वृश्चिकवृश्चिकNe (ने)

अनुराधा दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?

चंद्रमा अनुराधा में हो तो जीवन शनि महादशा (19 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद बुध दशा आती है।

गुण मिलान में अनुराधा की क्या भूमिका है?

समान नाड़ी (मध्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।

समान गण (देव) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाति, श्रवण, रेवती.

समान योनि (मृग) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: ज्येष्ठा.

अनुराधा के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?

अनुराधा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

अनुराधा का स्वामी शनि है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा शनि की होती है।

अनुराधा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: ना, नी, नू, ने।

अनुराधा का गण और नाड़ी क्या है?

गण: देव, नाड़ी: मध्य, योनि: मृग।

शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम

पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।

शिशु नाम रिपोर्ट

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