धनिष्ठा नक्षत्र
Dhanishtha · स्वामी मंगल · 23°20′ मकर – 6°40′ कुंभ
धनिष्ठा, 'सबसे धनी', के देवता अष्ट वसु हैं और प्रतीक डमरू है। यह लय, संगीत और समृद्धि का नक्षत्र है। जातक महत्वाकांक्षी, उदार, संगीतप्रिय और समूह में कुशल होते हैं। मंगल ऊर्जा व साहस देता है। राशिचक्र में धनिष्ठा 23°20′ मकर से 6°40′ कुंभ तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 23°20′ मकर | सिंह | Ga (गा) |
| 2 | 26°40′ मकर | कन्या | Gi (गी) |
| 3 | 29°60′ मकर | तुला | Gu (गू) |
| 4 | 3°20′ कुंभ | वृश्चिक | Ge (गे) |
धनिष्ठा दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा धनिष्ठा में हो तो जीवन मंगल महादशा (7 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद राहु दशा आती है।
गुण मिलान में धनिष्ठा की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (मध्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (राक्षस) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा.
समान योनि (सिंह) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: पूर्वा भाद्रपद.
धनिष्ठा के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
धनिष्ठा का स्वामी मंगल है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा मंगल की होती है।
धनिष्ठा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: गा, गी, गू, गे।
धनिष्ठा का गण और नाड़ी क्या है?
गण: राक्षस, नाड़ी: मध्य, योनि: सिंह।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।