भरणी नक्षत्र
Bharani · स्वामी शुक्र · 13°20′ मेष – 26°40′ मेष
भरणी के देवता धर्म और अंत के स्वामी यम हैं और प्रतीक योनि (गर्भ) है। यह धारण करने का नक्षत्र है — ज़िम्मेदारी, रचनात्मकता और तीव्र अनुभवों को तब तक सँभालना जब तक वे जन्म न ले लें। भरणी जातक दृढ़-इच्छा, कठिन सत्य कहने वाले और सहनशील होते हैं।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 13°20′ मेष | सिंह | Li (ली) |
| 2 | 16°40′ मेष | कन्या | Lu (लू) |
| 3 | 19°60′ मेष | तुला | Le (ले) |
| 4 | 23°20′ मेष | वृश्चिक | Lo (लो) |
भरणी दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा भरणी में हो तो जीवन शुक्र महादशा (20 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद सूर्य दशा आती है।
गुण मिलान में भरणी की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (मध्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (मनुष्य) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: रोहिणी, आर्द्रा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद.
समान योनि (गज) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: रेवती.
भरणी के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
भरणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
भरणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा शुक्र की होती है।
भरणी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: ली, लू, ले, लो।
भरणी का गण और नाड़ी क्या है?
गण: मनुष्य, नाड़ी: मध्य, योनि: गज।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।