रोहिणी नक्षत्र
Rohini · स्वामी चंद्र · 10°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभ
रोहिणी, 'लाल तारा', मिथक में चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र है और इसके देवता प्रजापति ब्रह्मा हैं। यह 27 में सबसे उर्वर और विकासोन्मुख है — फसल से भरी बैलगाड़ी। रोहिणी जातक आकर्षक, कलाप्रिय, सुखप्रिय और चीज़ों को फलने-फूलने देने में निपुण माने जाते हैं।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 10°00′ वृषभ | मेष | O (ओ) |
| 2 | 13°20′ वृषभ | वृषभ | Va (वा) |
| 3 | 16°40′ वृषभ | मिथुन | Vi (वी) |
| 4 | 20°00′ वृषभ | कर्क | Vu (वू) |
रोहिणी दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा रोहिणी में हो तो जीवन चंद्र महादशा (10 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद मंगल दशा आती है।
गुण मिलान में रोहिणी की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (अंत्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (मनुष्य) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: भरणी, आर्द्रा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद.
समान योनि (सर्प) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: मृगशिरा.
रोहिणी के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
रोहिणी का स्वामी चंद्र है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा चंद्र की होती है।
रोहिणी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: ओ, वा, वी, वू।
रोहिणी का गण और नाड़ी क्या है?
गण: मनुष्य, नाड़ी: अंत्य, योनि: सर्प।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।