श्रवण नक्षत्र
Shravana · स्वामी चंद्र · 10°00′ मकर – 23°20′ मकर
श्रवण, 'सुनना', के देवता विष्णु हैं और प्रतीक कान व तीन पदचिह्न। यह सुनने और सीखने का नक्षत्र है — मौखिक परंपरा से ज्ञान का संचार। जातक ध्यान देने वाले, ज्ञानी और शिक्षण व परामर्श में निपुण होते हैं। राशिचक्र में श्रवण 10°00′ मकर से 23°20′ मकर तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 10°00′ मकर | मेष | Khi (खी) |
| 2 | 13°20′ मकर | वृषभ | Khu (खू) |
| 3 | 16°40′ मकर | मिथुन | Khe (खे) |
| 4 | 20°00′ मकर | कर्क | Kho (खो) |
श्रवण दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा श्रवण में हो तो जीवन चंद्र महादशा (10 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद मंगल दशा आती है।
गुण मिलान में श्रवण की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (अंत्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, रेवती. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (देव) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाति, अनुराधा, रेवती.
समान योनि (वानर) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: पूर्वाषाढ़ा.
श्रवण के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन है?
श्रवण का स्वामी चंद्र है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा चंद्र की होती है।
श्रवण नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: खी, खू, खे, खो।
श्रवण का गण और नाड़ी क्या है?
गण: देव, नाड़ी: अंत्य, योनि: वानर।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।