उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
Uttara Ashadha · स्वामी सूर्य · 26°40′ धनु – 9°60′ मकर
उत्तराषाढ़ा, 'उत्तर विजय', के देवता विश्वेदेव हैं और प्रतीक हाथी-दाँत है। यह स्थायी, नैतिक सफलता का नक्षत्र है — वह विजय जो निष्पक्षता से मिली और टिकती है। जातक सिद्धांतवादी, धैर्यवान और सम्मानित होते हैं। राशिचक्र में उत्तराषाढ़ा 26°40′ धनु से 9°60′ मकर तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 26°40′ धनु | धनु | Bhe (भे) |
| 2 | 0°00′ मकर | मकर | Bho (भो) |
| 3 | 3°20′ मकर | कुंभ | Ja (जा) |
| 4 | 6°40′ मकर | मीन | Ji (जी) |
उत्तराषाढ़ा दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा उत्तराषाढ़ा में हो तो जीवन सूर्य महादशा (6 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद चंद्र दशा आती है।
गुण मिलान में उत्तराषाढ़ा की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (अंत्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, श्रवण, रेवती. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (मनुष्य) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद.
उत्तराषाढ़ा के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा सूर्य की होती है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: भे, भो, जा, जी।
उत्तराषाढ़ा का गण और नाड़ी क्या है?
गण: मनुष्य, नाड़ी: अंत्य, योनि: नकुल।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।