मघा नक्षत्र
Magha · स्वामी केतु · 0°00′ सिंह – 13°20′ सिंह
मघा, 'शक्तिशाली' (रेगुलस), के देवता पितृ हैं और प्रतीक राजसिंहासन है। यह वंश, परंपरा और अर्जित अधिकार का नक्षत्र है। मघा जातक पारिवारिक परंपरा से जुड़ाव और गरिमा रखते हैं। केतु राजसी सतह के नीचे वैराग्य का भाव देता है। राशिचक्र में मघा 0°00′ सिंह से 13°20′ सिंह तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 0°00′ सिंह | मेष | Ma (मा) |
| 2 | 3°20′ सिंह | वृषभ | Mi (मी) |
| 3 | 6°40′ सिंह | मिथुन | Mu (मू) |
| 4 | 10°00′ सिंह | कर्क | Me (मे) |
मघा दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा मघा में हो तो जीवन केतु महादशा (7 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद शुक्र दशा आती है।
गुण मिलान में मघा की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (अंत्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (राक्षस) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: कृत्तिका, आश्लेषा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा, शतभिषा.
समान योनि (मूषक) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: पूर्वा फाल्गुनी.
मघा के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
मघा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मघा का स्वामी केतु है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा केतु की होती है।
मघा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: मा, मी, मू, मे।
मघा का गण और नाड़ी क्या है?
गण: राक्षस, नाड़ी: अंत्य, योनि: मूषक।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।